Thursday, February 6, 2020

बाकी है....

मेरे एहसास बाकी है
मेरे जज्बात बाकी है
मैं चाहूँ तुझसे सब कहना
मेरे अल्फ़ाज़ बाकी हैं ।।

तू चाहे जिस गली जाये
मैं ढूँढूँगी तुझे हर दम 
तेरे काँधे पे सर रख के
देखना चांद बाकी है।।

तू इतना मतलबी कैसे
हुआ है,मुझको समझा दे
भले कोई भी कुछ कह ले
मेरा यकीन बाकी है।।

मैं हूँ नाराज़ तुझसे,
तुझको ऐसा क्यों लगता है?
मेरी आंखों मे आके देख
तेरा ही अक्स बाकी है।।

है ऐसा कौन सा रिश्ता
की हम तुम जुड़ रहे ऐसे
ना कोई नाम भी जिसका
ये कैसा  दर्द बाकी है।।

तू अपने आप मे खुश हो
मैं मेरे मैं मे ही खुश हूँ,
बस इतनी इल्तज़ा है ये
कि दिल मे याद बाकी है।।।

aparna..